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Friday, August 12, 2011

Fwd: भाषा,शिक्षा और रोज़गार



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From: भाषा,शिक्षा और रोज़गार <eduployment@gmail.com>
Date: 2011/8/12
Subject: भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To: palashbiswaskl@gmail.com


भाषा,शिक्षा और रोज़गार


सीबीएसईःअब स्टूडेंट्स भरेंगे फीडबैक फॉर्म

Posted: 11 Aug 2011 05:01 AM PDT

सीबीएसई की ग्रेडिंग प्रणाली सीसीई (सतत समग्र मूल्यांकन) से स्टूडेंट्स कितने फ्रेंडली हुए, उससे स्टूडेंट्स को क्या फायदा हुआ या क्या दिक्कत आ रही है, इस बारे में स्टूडेंट्स अब अपनी बात बेबाक तरीके से बोर्ड के सामने रख सकते हैं। इसके साथ ही वे बोर्ड की कार्यप्रणाली पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे सकते हैं।

इसके लिए सीबीएसई ने स्टूडेंट्स से 5 प्रश्नों के रूप में फीडबैक मांगा है। सीबीएसई ने सीसीई के लिए पहले सीसीई स्पेशल रिसर्च सेंटर बनाया फिर शुरुआती दौर में पेरेंट्स और एजुकेशनल एक्सपर्ट्स का फीडबैक लिया। शहर के सीबीएसई स्कूलों के प्राचार्यो के अनुसार फॉर्म का सिस्टम इसलिए है कि हर स्टूडेंट को अपनी बात कहने का पूरा मौका मिले।


फीडबैक के लिए 9,10 और 11वीं के स्टूडेंट्स को चुना गया है। इसमें ऑनलाइन पांच प्रश्न दिए हैं। जिसे भरकर ऑनलाइन भेजना है। इसे भेजने की अंतिम तिथि 1 सितंबर है। अप्रैल, 2011 से सीबीएसई ने सतत समग्र मूल्यांकन प्रणाली कक्षा 6,7 और 8 में भी लागू कर दी है।

ये 5 प्रश्न हैं फीडबैक ऑनलाइन फॉर्म में

1.क्या सीसीई आपके मूल्यांकन का सही तरीका है?

2.क्या मार्क्‍स आपकी क्षमताओं को सही तरीके से प्रदर्शित कर पाता है?

3.क्या सीसीई आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है?

4.सीसीई के बाद आपका तनाव कुछ कम हुआ है?

5.क्या सीसीई और ज्यादा सीखने के लिए प्रोत्साहित करता है?

इन सवालों का जवाब देते हुए हां, ना या कारण बताना है(दैनिक भास्कर,भोपाल,11.8.11)।

बदलने पड़ेंगे री-वैल्यूएशन के नियम

Posted: 11 Aug 2011 04:59 AM PDT

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत छात्रों को परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा विभाग को री-वैल्यूएशन संबंधी अपने नियमों को बदलना पड़ सकता है। फिलहाल छात्रों को रिजल्ट घोषित होने के 15 दिनों के अंदर री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन देना होता है, जबकि आरटीआई के तहत एक महीने के भीतर जानकारी देने का प्रावधान है। हालांकि स्कूल शिक्षा विभाग में रिजल्ट घोषित होने के तीस दिन बाद तक रीटोटलिंग के लिए आवेदन किए जा सकते हैं।


दो साल पहले उच्च शिक्षा विभाग ने सेमेस्टर सिस्टम लागू करने के साथ ही छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिका दिखाने की व्यवस्था है। इस साल करीब 150 विद्यार्थियों ने इस सुविधा का लाभ लेते हुए अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखीं। दूसरी तरफ माध्यमिक शिक्षा मंडल हाईस्कूल और हायर सेकंडरी परीक्षा की उत्तर पुस्तिका की फोटो कॉपी डाक से छात्रों के घर पहुंचाता है। इसके लिए छात्रों को आवेदन करना पड़ता है। मंडल के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस साल मंडल ने 15 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सभी ने स्वागत किया है, हालांकि इसके अमल में दिक्कतें भी कम नहीं हैं।
ये होंगे फायदे

मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ेगी
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (बीयू) की कुलपति प्रोफेसर निशा दुबे मानती हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निश्चित तौर पर वैल्यूएशन में पारदर्शिता बढ़ेगी, हालांकि स्टाफ पर काम का बोझ और बढ़ जाएगा। इसके लिए बीयू को अलग सेल का गठन करना पड़ेगा, क्योंकि सालभर में हजारों छात्र विभिन्न परीक्षाओं में शामिल होते हैं। इस फैसले के बाद अब हर छात्र चाहेगा कि वो भी अपनी कॉपी देखे।

अभिभावकों को नहीं कर पाएंगे गुमराह 
वरिष्ठ शिक्षाविद रमेश दवे ने इस प्रक्रिया को छात्रों के हित में बताया है। इससे विद्यार्थी अपने अभिभावकों से ये नहीं सकेंगे कि उन्होंने सही जवाब लिखे थे, फिर भी कम नंबर मिले।

अड़चनें भी हैं
री-वैल्यूएशन में दिक्कत
प्रो. निशा दुबे के अनुसार नई प्रक्रिया में जो सबसे बड़ी व्यावहारिक कठिनाई आएगी, वो ये है कि रिजल्ट घोषित होने के 15 दिन के भीतर री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन जमा करना होता है। जबकि आरटीआई में कॉपी 30 दिनों के भीतर देने का प्रावधान है।

मेरिट लिस्ट घोषित करने में देरी
माशिमं की सचिव डॉ. मधु खरे के अनुसार इस प्रक्रिया का फायदा विद्यार्थियों को ही है। वे उत्तर पुस्तिका में की गई गलती को सुधरवाकर अपने नंबर बढ़वा सकते हैं, हालांकि माशिमं को इसका सीधे तौर पर नुकसान होने लगा है। जब तक सारे प्रकरण नहीं निपट जाते, माशिमं अपनी स्थाई मेरिट लिस्ट घोषित नहीं कर पाता(दैनिक भास्कर,भोपाल,11.8.11)।

मध्यप्रदेशःअब नौकरी के लिए भी सीईटी

Posted: 11 Aug 2011 04:58 AM PDT

नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनी (नैसकॉम) अब इंजीनियरिंग के फाइनल ईयर में पढ़ रहे छात्रों के लिए नैकटेक ऑनलाइन एक्जाम आयोजित करेगा। इस कॉमन एंट्रेंस एक्जाम के स्कोर के आधार पर आईटी कंपनियां कैंडिडेट्स का इंटरव्यू के बाद चुनाव करेंगी।

दरअसल, कंपनियों को हर साल कैंपस सिलेक्शन के लिए देश के अलग-अलग कॉलेजों में जाना होता है जिससे मानव संसाधन विभाग का समय और खर्च काफी बढ़ जाता है। इस टेस्ट के जरिए एक यूनिफॉर्म तरीके से कैंडिडेट्स का चयन हो सकेगा। इसका फायदा स्टूडेंट्स को इस तरह मिलेगा कि वे देश की नामी कंपनियों में जॉब पा सकेंगे।


अभी तक होता यूं था कि जिन इंजीनियरिंग कॉलेजों के छह से सात साल पूरे नहीं होते थे वहां कई कंपनियां कैंपस के लिए नहीं आती थीं लेकिन अब जो छात्र नैकटेक परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं वे अपने नाम कॉलेज को दे सकते हैं। इसके बाद कॉलेज नैसकॉम से संपर्क कर कैंपस में ऑनलाइन परीक्षा करा सकते हैं। हालांकि यह परीक्षा अनिवार्य नहीं है लेकिन इसका फायदा स्टूडेंट्स को मिलेगा। इसके लिए इस साल अगस्त माह से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 

छात्र के पास होगी च्वाइस 
कैंडिडेट के अंतिम चुनाव के लिए इंटरव्यू भी होगा। इस टेस्ट का स्कोर हासिल करने के बाद कैंडिडेट के पास मौका होगा कि वे एक से अधिक कंपनियों के इंटरव्यू दे सकता है और हो सकता है कि दो कंपनियां उसका चुनाव कर लें। आईईएस की ग्रुप डायरेक्टर प्रो. सुनीता सिंह कहती हैं स्टूडेंट के पास चॉइस होगी कि वे किस कंपनी में जाना चाहता है। 

हालांकि ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को कम्युनिकेशन स्किल्स में दिक्कत हो सकती है लेकिन उसका रास्ता कॉलेज अपने कैंपस में इस टेस्ट के लिए तैयारी करवा कर निकाल सकते हैं। कॉलेज में रेगुलर बेसिस पर एटीकेट्स और कम्युनिकेशन एंड लैंग्वेज क्लास लगना हमेशा से ही जरूरी है।

लैंग्वेज के कारण ही बाहर 
ओरियंटल कॉलेज के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ग्रुप डायरेक्टर अनुज गर्ग कहते हैं, सभी कंपनियां इस टेस्ट का स्कोर लेंगी यह कहना मुश्किल है क्योंकि हर कंपनी अलग-अलग मापदंडों पर कैंडिडेट को परखती है। एक कॉमन टेस्ट में हो सकता है कि उनकी जरूरतें पूरी न हों। इसलिए कम्युनिकेशन स्किल्स को परखने के लिए इंटरव्यू या ग्रुप डिस्कशन तो होगा ही। स्टूडेंट्स को एक बात याद रखना है कि अब किसी भी कंपनी में काम करने की पहली शर्त अंग्रेजी भाषा का ज्ञान साथ ही फ्लुएंसी जरूरी है। तकनीकी नॉलेज में मजबूत छात्र भाषा के कारण ही चयन प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं।

कब से शुरू होगा
अगस्त माह से कॉलेज इस टेस्ट के लिए नैसकॉम को एप्लाई कर सकते हैं। 

कैसे होगा टेस्ट
कॉलेज कैंपस में ही ऑनलाइन टेस्ट आयोजित कराया जाएगा। जिसमें छात्र हिस्सा ले सकते हैं(दैनिक भास्कर,भोपाल,11.8.11)।

पीयू में स्नातकोत्तर में नामांकन शुरू

Posted: 11 Aug 2011 04:55 AM PDT

पटना विविद्यालय (पीयू) में स्नातकोत्तर में नामांकन आज से शुरू हो गया। सोमवार को इतिहास व अर्थशास्त्र की मेधा सूची जारी की गई थी। मंगलवार को रसायन शास्त्र, समाज शास्त्र, भूगोल की मेधा सूची जारी कर दी गई। नामांकन 27 अगस्त तक लिया जायेगा। 28 अगस्त से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। अन्य विषयों की भी मेधा सूची भी अभी जारी की जाएगी।

स्नातकोत्तर की मेधा सूची समाज शास्त्र वर्ग सभी छात्रों के लिए सामान्य 561 बीसी 2 425 बीसी 1 403 एससी 394 एसटी ---- बीसी (महिला) 422 भूगोल पीयू के छात्रों के लिए अन्य विवि के छात्रों के लिए सामान्य 540 554 बीसी 2 432 439 बीसी 1 458 506 एससी 496 499 एसटी ----- ---- बीसी (महिला) 513 ---- रसायन शास्त्र वर्ग पीयू के लिए अन्य विवि के छात्रों के लिए सामान्य 562 582 बीसी 2 523 580 बीसी 1 448 572 एससी 469 480 एसटी ---- ---- बीसी (महिला) 486(राष्ट्रीय सहारा,पटना,10.8.11)

सवा तीन घंटे की होगी उप्र बोर्ड परीक्षा

Posted: 11 Aug 2011 04:54 AM PDT

राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षाओं में छात्रों को और अधिक समय देने का फैसला किया है। अब छात्रों को प्रश्नपत्र प़ढ़ने के लिए पंद्रह मिनट अलग से दिए जाएंगे। कुल मिलाकर छात्रों को सवा तीन घंटे में प्रश्नपत्र करना होगा। अभी तक तीन घंटे का समय दिया जाता था।

बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों का पारिश्रमिक भी सीबीएसई और आईसीएसई की तर्ज पर दिया जाएगा। जबकि दस से पंद्रह छात्र संख्या वाले सहायता प्राप्त विद्यालयों का अनुदान वापस लिया जा सकता है। इस बाबत ऐसे तकरीबन आठ सौ विद्यालयों को नोटिस भेजकर छात्र संख्या ब़ढ़ाने के निर्देश दिए हैं। यह बात माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने बुधवार को लखनऊ में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार वर्ष-२०११ के तहत हुई संगोष्ठी में कही(नई दुनिया,दिल्ली,11.8.11)।

लखनऊ विश्वविद्यालयःआदेश एक, व्याख्या अनेक

Posted: 11 Aug 2011 01:59 AM PDT

- श्री जयनारायण पीजी कॉलेज में अभी तक स्नातक की बढ़ी हुई बीस प्रतिशत सीटों के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। प्राचार्य डॉ.एसडी शर्मा बिना सर्कुलर प्रवेश को नियम विरुद्ध मानते हैं। 
- कालीचरण पीजी कॉलेज ने बढ़ी हुई सीटों पर प्रवेश दिया। प्राचार्य डॉ.वीएन मिश्र प्रवेश समिति के फैसले को लविवि का निर्णय मानते हैं। 
- एपी सेन पीजी कॉलेज ने बीच का रास्ता अपनाया। बढ़ी हुई सीटों पर प्रवेश लिया लेकिन अस्थाई तौर पर। यह बात अभ्यर्थियों को भी बता दी गई है। 
यह तीन उदाहरण स्नातक कक्षाओं में सीट वृद्धि को लेकर कॉलेजों की दुविधा और मनमानी दोनों को बयान कर रहे हैं। लविवि प्रवेश समिति ने स्नातक कक्षाओं में बीस प्रतिशत सीट बढ़ाने का निर्णय किया। एक महीने पहले हुए फैसले का सर्कुलर अभी तक कॉलेजों को नहीं मिला है लिहाजा हर कॉलेज ने आदेश के अपने मायने निकाले। लविवि कुलसचिव जीपी त्रिपाठी जल्द ही सर्कुलर जारी होने की बात कहते हैं लेकिन उन्हें इसमें कोई गड़बड़ी नहीं दिखती लेकिन लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ.मनोज पांडेय इसे छात्रों के साथ धोखा करार देते हैं। स्नातक कक्षाओं में सीट वृद्धि का सकुर्लर जारी करने में लविवि प्रशासन की सुस्ती और कॉलेजों की मनमानी के बीच सैकड़ों विद्यार्थियों के हित प्रभावित हो रहे हैं। समय से आदेश की प्रति मिलने पर जिन मेधावियों को नियमित सीट पर दाखिला मिल सकता था उन्होंने भी दुविधा के चलते स्ववित्तपोषित सीटों पर प्रवेश ले लिया। इधर जिन महाविद्यालयों ने बढ़ी हुई सीटों पर प्रवेश नहीं लिया है उन्हें अभ्यर्थियों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ रहा है। दूरदराज के जिलों से प्रवेश की इच्छा में लखनऊ आने वाले अभ्यर्थी इन कॉलेजों पर गुपचुप प्रवेश का आरोप लगाते हुए आए दिन हंगामा करते हैं। कई कॉलेजों ने स्ववित्तपोषित सीटों पर ही प्रवेश किया है। लुआक्टा अध्यक्ष डॉ.मनोज पांडेय इस देरी के लिए लविवि की लापरवाह कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराते हैं। उनका कहना है कि छात्रहित को देखते हुए सर्कुलर जारी किया जा सकता था(दैनिक जागरण,लखनऊ,11.8.11)।

उत्तराखंडःशिक्षकों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की मांग

Posted: 11 Aug 2011 01:54 AM PDT

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने स्कूल-कालेजों में शिक्षकों को रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्त करने की मांग की है। साथ ही प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षकों के स्थानान्तरण को चालू सत्र में शून्य घोषित करने का विरोध किया है। महासंघ के प्रतिनिधि मंडल ने विधान सभा स्थित कार्यालय में प्रदेश के शिक्षा मंत्री से वार्ता की। शिक्षक नेताओं ने कहा कि शासकीय व अशासकीय विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद रिक्त होने के कारण शिक्षण पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। कई स्कूल तो शिक्षकों के न होने के कारण बंद पड़े हैं। सरकार से हरी झण्डी मिलने के बाद भी अशासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया ठप है, जबकि जूनियर हाई स्कूलों के उच्चीकरण की समस्या का भी अभी तक समाधान नहीं हुआ है। नई व्यवस्था में जू. हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक की अगले पदों पर पदोन्नति का रास्ता बंद है वार्ता में उन्होंने स्थानान्तरण के लिहाज से शून्य सत्र घोषित करने के सरकार के निर्णय पर असहमति जताई। शिक्षक नेताओं ने कहा कि शिक्षकों के लिए स्थायी स्थानान्तरण नीति शीघ्र घोषित की जानी चाहिए। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। वार्ता में शिक्षा मंत्री खजान दास ने बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का आासन दिया। उन्होंने कहा कि स्थानान्तरण नीति तय होने के बाद ही शिक्षकों का स्थानान्तरण संभव है। उन्होंने अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले शिक्षणोत्तर कर्मचारियों को शिक्षक संवर्ग में सेवा का अवसर प्रदान करने के लिए सकारात्मक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,11.8.11)।

डीयू के जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज में छात्राओं ने फिर से परीक्षा लेने पर रखीं अपनी शर्तें

Posted: 11 Aug 2011 04:56 AM PDT

जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज की छात्राओं ने फिर से परीक्षा लेने पर नई शर्त रखी है। छात्राओं का कहना है कि विवि का परीक्षा विभाग फिर से परीक्षा लेने पर तैयारी का समय दे और पाठ्यक्रम कम करके प्रश्न पूछे । कॉपी परीक्षा विभाग ने खोई है, छात्रों ने नहीं। हालांकि प्रशासन इससे इंकार कर रहा है। वह छात्राओं को अपने कॅरियर पर ध्यान देते हुए परीक्षा की तैयारी करने को कहा है।

जानकीदेवी कॉलेज में संस्कृत, दर्शनशास्त्र, अंग्रेजी और राजनीतिशास्त्र आनर्स की १०१ छात्राओं ने डिसिप्लीन कोर्स में समाजशास्त्र का पेपर दिया था। परीक्षा विभाग में इस पेपर की कॉपी खो गई। विभाग ने इन छात्राओं का रिजल्ट बाद में घोषित करने की बात कहकर फिर से १९ अगस्त को पेपर देने को कह रहा है। छात्राएं इसका विरोध कर रही हैं। कॉलेज की छात्राएं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर मीडिया को बताया कि यह गलती विभाग से हुई है इसलिए पीड़ित पक्ष को रियायत मिलनी चाहिए। फिर से परीक्षा लेने पर तैयारी का समय कम है। इसलिए उनकी मांग है कि परीक्षा की तिथि को १० दिन और बढ़ा दी जाए। 


इसके अलावा सिलेबस घटाकर सवाल पूछे जाएं। उधर परीक्षा विभाग के डीन प्रो आरसी शर्मा ने छात्राओं पर दूसरे की बात पर ध्यान नहीं देने को कहा है। उन्होंने कहा कि छात्राएं शिक्षक की बातों से गुमराह न हों। वे १९ को अपना पेपर देकर आगे की पढ़ाई पर ध्यान दें। विभाग उन्हें सहयोग देने को तैयार है(नई दुनिया,दिल्ली,11.8.11)।

दैनिक भास्कर ने इसे और अधिक विस्तार से छापा हैः
उत्तर पुस्तिकाएं गुम होने से परेशान जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज की छात्राओं ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन से राहत की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि 19 अगस्त की प्रस्तावित पुन: परीक्षा में अब कुछ दिन ही शेष रह गए हैं, इसलिए या तो परीक्षा तिथि को 10 दिन आगे बढ़ा दिया जाए या फिर पाठ्यक्रम में ही कटौती की जाए, लेकिन उनकी इस मांग को डीन परीक्षा विभाग ने यह कहते हुए नकार दिया है कि विभाग अपनी गलती स्वीकार करता है, पर इसका यह कतई मतलब नहीं है कि छात्राओं की हर नाजायज बात को स्वीकार किया जाए। बेहतर होगा कि छात्राएं अपनी तैयारी पर ध्यान दें।


जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज में सोशलॉजी डिस्पिलन के पेपर की उत्तर पुस्तिकाएं खो जाने की समस्या से 106 छात्राएं सीधे तौर पर प्रभावित हुई हैं। द्वितीय वर्ष की यह छात्राएं फिलॉस्फी ऑनर्स, अंग्रेजी ऑनर्स, हिन्दी ऑनर्स, संस्कृत ऑनर्स और राजनीति विज्ञान ऑनर्स से हैं। उनका कहना है कि गलती उनकी नहीं है, इसलिए उन्हें राहत मिलनी चाहिए। एक पीड़ित छात्रा ने कहा कि परीक्षा विभाग की गलती के बावजूद हमारी मांग है कि परीक्षा 19 के बजाए 29 अगस्त को आयोजित की जाए, ताकि तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके। यदि यह भी सम्भव नहीं है तो पाठ्यक्रम में कटौती कर दी जाए, ताकि 19 अगस्त की परीक्षा में ही वे तैयारी के साथ बैठ सकें।

इस मामले पर जब डीन परीक्षा विभाग प्रो. आरसी शर्मा से पूछा गया तो उनका कहना था कि उत्तर पुस्तिकाएं खो जाने का मामला हैरान करने वाला है। इसमें छात्राओं की कोई गलती नहीं है, लेकिन परीक्षा के अलावा मूल्यांकन का कोई अन्य विकल्प उनके पास नहीं है, इसलिए छात्राएं परीक्षा की तैयारी करें तो बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर पुस्तिकाआें की खोजबीन अभी भी जारी है और यदि 19 अगस्त से पहले वे मिल जाती हैं तो मुमकिन है कि परीक्षा रद्द भी कर दी जाए। इसके साथ ही, डीन ने साफ किया है कि गलती बड़ी है, इसलिए दोषियों के खिलाफ न सिर्फ कार्रवाई होगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी पूर्ण व्यवस्था तैयार की जाएगी।

कुलपति के जवाब का इंतजार
छात्रों की समस्याओं को लेकर अक्सर दिल्ली विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. दिनेश सिंह अपने ईमेल आईडी-  का प्रचार करते रहते हैं, लेकिन जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज की छात्राओं की नजर में इस सुविधा को कोई लाभ नहीं है। उनका कहना है कि परीक्षा विभाग की ओर से उत्तर पुस्तिकाएं खोने के बाद उन पर बिना उनकी सलाह लिए पुन: परीक्षा का दबाव बनाया जा रहा है और इसकी जानकारी कुलपति को ई-मेल के जरिये दो दिन पहले ही दी जा चुकी है। बावजूद इसके अभी तक उनका कोई जवाब नहीं आया है। छात्राओं का कहना है कि जिस तरह से उनकी समस्या को लेकर कुलपति शांत हैं, उससे तो यही लगता है कि उन्हें ई-मेल करने का कोई लाभ नहीं है।

उत्तराखंडःअब कालेजों में ही खुलेंगे उपकरण अनुरक्षण केंद्र

Posted: 11 Aug 2011 01:51 AM PDT

अब प्रदेश के कॉलेजों को विज्ञान प्रयोगशालओं के उपकरणों की ठीक कराने के लिए दूसरे या निजी संस्थानों का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। क्योंकि कॉलेजों में ही अब उपकरण अनुरक्षण केंद्र खोल कर उनकी मरम्मत की व्यवस्था की जाएगी। 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत विविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विविद्यालयों के रजिस्ट्रारों से कहा है कि वे उनसे संबद्ध विज्ञान विषयों वाले कॉलेजों और स्वायत्त शासी महाविद्यालयों से इस बाबत प्रस्ताव तैयार करा कर भेजें ताकि वे यूजीसी की इस योजना का लाभ उठा सकें। यूजीसी के संयुक्त सचिव राजेश आनंद ने पत्र लिखकर कहा है कि विवि उनसे संबद्ध विज्ञान विषय वाले कॉलेजों से वर्ष 2011-12 में उपकरण अनुरक्षण केंद्र खोलने के लिए जल्द से जल्द प्रस्ताव भिजवाएं। विवि इसके लिए कॉलेजों को वित्तीय मदद मुहैया कराएगा(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,11.8.11)
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Palash Biswas
Pl Read:
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