चेन्नई। पंजीकरण की तिथि नजदीक आने के साथ ही अबतक 8000 से अधिक भारतीयों ने मंगलग्रह की यात्रा करने और वहीं बस जाने के लिए हस्ताक्षर किए हैं, दरअसल 'मार्स वन' परियोजना के तहत वहां अगले 10 साल में एक कॉलोनी बसाने की योजना है। गैर लाभकारी संगठन 'मार्स वन' वर्ष 2023 तक मंगलग्रह पर स्थायी मानव बस्ती बनाना चाहता है और इसमें जिन लोगों की दिलचस्पी है, वे पंजीकरण करा रहे हैं। भारत 27 अगस्त को 8107 आवेदकों के साथ दुनिया में विभिन्न देशों के बीच चौथे स्थान पर था। 'मार्स वन' से जुड़ीं आशिमा डोगरा ने प्रेस ट्रस्ट से कहा कि पंजीकरण करने वाले शीर्ष दस देश अमेरिका (37,852) चीन (13124), ब्राजील (8686), भारत (8107), रूस (7138), ब्रिटेन (6999), मैक्सिको (6,771), कनाडा (6593), स्पेन (3,621) और फिलिपीन (3516) हैं। पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 अगस्त है और 'मार्स वन' को 1,65,000 लोगों के आवेदन मिल गए हैं जो मंगल पर बसने वाले पहले मानव बनने की आस लगाए हैं। 'मार्स वन' मानता है कि लाल ग्रह पर मानव बस्ती बनाना वर्तमान प्रौद्योगिकियों से संभव है और उसने अच्छी पर परीक्षण से गुजर चुके और उद्योग जगत से आसानी से उपलब्ध अवयवों की मदद लेने की योजना बनायी है। डोगरा ने कहा कि इस मिशन में कार्गो मिशन तथा पर्यावास के लिए मानवरहित तैयारी तथा उसके बाद मानव के वहां पहुंचने की योजना है। डोगरा ने कहा,''आने वाले वर्षां में एक प्रदर्शन मिशन, संचार उपग्रह, दो रोवर और कई कार्गो मिशन मंगल ग्रह पर भेजे जायेंगे। ये मिशन वहां चौकी स्थापित करेंगे जहां चालक दल के सदस्य रहेंगे और काम करेंगे। '' स्थायी बस्ती के लिए मानव चालकदल का चयन एवं उनका प्रशिक्षण पहले ही शुरू हो चुका है। डोगरा ने कहा, ''अंतरिक्ष यात्रियों की खोज अप्रैल, 2013 में शुरू हुई। पहले ही दो सप्ताह में 78 हजार से अधिक लोगों ने चयन कार्यक्रम के लिए पंजीकरण करवाया। '' मार्स वन एक डच गैर लाभकारी फाउंडेशन है। |
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