Twitter

Follow palashbiswaskl on Twitter
Follow palashbiswaskl on Twitter

Thursday, May 26, 2016

तनिको पांव जमाके रखिये जमीन पर दोस्तों कि आसमान गिर रहा है जमीन को खाने के लिए। मनुष्यता बची नहीं रहेगी तो प्रकृति और पृथ्वी के बचे होने की कोई उम्मीद भी नहीं है। मराठी जनता अपने साहित्य.संस्कृति और पत्रकारिता की बहुरंगी विरासत के प्रति हिंदी दुनिया के मुकाबले बहुत ज्यादा संवेदनशील है तो हमें खुशी हो रही है कि हम नागपुर में 28 मई को बाबासाहेब की दीक्षाभूमि पर खड़ी जनता के बीच वहां हस्तक्षेप का मराठी और बांग्ला में विस्तार करने जा रहे हैं। जनांदोलन और जनमोर्चे पर क्या होगा,हम नहीं जानते लेकिन वैकल्पिक मीडिया के मोर्चे पर अमलेंदु उपाध्याय, यशवंत सिंह, अभिषेक श्रीवास्तव, रेयाजुल हक, साहिल, प्रमोद रंजन, चंदन,सुनील खोब्रागडे,डा.सुबोध बिश्वास,अशोक बसोतरा, अभिराम मल्लिक, ज्ञानशील,शरदेंदु बिश्वास,संजय जोशी,कस्तूरी, दिलीप मंडल,संजीव रामटेके,प्रमोड कांवड़े, अयाज मुगल जैसे कार्यकर्ताओं के हाथ बैटन है और उन्हें नेतृत्वकारी भूमिका के लिए खुद को जल्द से जल्द तैयार होना होगा और आपस में समन्वय भी बनाना होगा। जनता के बेशकीमती ख्वाबों की बहाली अब जनप्रतिबद्धता का सबसे बड़ा कार्यभार है और इसलिए बाबासाहेब का जाति उम्मूलन का मिशन सबसे ज्यादा प्रासंगिक है क्योंकि जाति व्यवस्था की नींव पर ही यह धर्मोन्माद का तिलिस्म मुक्त बाजार है। आप तनिक भी हमारी या हमारे मिशन की परवाह करते हों तो हस्तेक्षेप के पोर्टल के टाप पर ललगे पे यू एप्स बटन पर तुरंत जो भी आप पे कर सकें तुरंत कीजिये।यह समर्थन मिला तो हम जरूर कामयाब होंगे।वरना हमारी मौत है। दुनिया के लिए आज सबसे बुरी खबर है कि डोनाल्ड ट्रंप वाशिंगटन जीत चुके हैं और व्हाइट हाउस के तमाम दरवाजे और खिड़कियां उनके लिए खुले हैं उसीतरह जैसे अबाध पूंजी के लिए हमने अगवाड़ा पिछवाड़ा खोल रखा है।संजोगवश आज ही भारत के चक्रवर्ती महाराज के राज्याभिषेक की दूसरी वर्षी के मौके पर भारत में विज्ञापनों की केसरिया सुनामी है।भारत और अमेरिका ही नहीं,सोवियत संघ के विघटन के बाद टुकटा टुकड़ा लेनिन का ख्वाब और गिरती हुई चीन की दीवार पर भी धर्मध्वजा फहरा दिया गया है। पलाश विश्वास

तनिको पांव जमाके रखिये जमीन पर दोस्तों कि आसमान गिर रहा है जमीन को खाने के लिए।

मनुष्यता बची नहीं रहेगी तो प्रकृति और पृथ्वी के बचे होने की कोई उम्मीद भी नहीं है।

मराठी जनता अपने साहित्य.संस्कृति और पत्रकारिता की बहुरंगी विरासत के प्रति हिंदी दुनिया के मुकाबले बहुत ज्यादा संवेदनशील है तो हमें खुशी हो रही है कि हम नागपुर में 28 मई को बाबासाहेब की दीक्षाभूमि पर खड़ी जनता के बीच वहां हस्तक्षेप का मराठी और बांग्ला में विस्तार करने जा रहे हैं।




जनांदोलन और जनमोर्चे पर क्या होगा,हम नहीं जानते लेकिन वैकल्पिक मीडिया के मोर्चे पर अमलेंदु उपाध्याय, यशवंत सिंह, अभिषेक श्रीवास्तव, रेयाजुल हक, साहिल, प्रमोद रंजन, चंदन,सुनील खोब्रागडे,डा.सुबोध बिश्वास,अशोक बसोतरा, अभिराम मल्लिक, ज्ञानशील,शरदेंदु बिश्वास,संजय जोशी,कस्तूरी, दिलीप मंडल,संजीव रामटेके,प्रमोड कांवड़े, अयाज मुगल जैसे कार्यकर्ताओं के हाथ बैटन है और उन्हें नेतृत्वकारी भूमिका के लिए खुद को जल्द से जल्द तैयार होना होगा और आपस में समन्वय भी बनाना होगा।

जनता के बेशकीमती ख्वाबों की बहाली अब जनप्रतिबद्धता का सबसे बड़ा कार्यभार है और इसलिए बाबासाहेब का जाति उम्मूलन का मिशन सबसे ज्यादा प्रासंगिक है क्योंकि जाति व्यवस्था की नींव पर ही यह धर्मोन्माद का तिलिस्म मुक्त बाजार है।

आप तनिक भी हमारी या हमारे मिशन की परवाह करते हों तो हस्तेक्षेप के पोर्टल के टाप पर ललगे  पे यू एप्स बटन पर तुरंत जो भी आप पे कर सकें तुरंत कीजिये।यह समर्थन मिला तो हम जरूर कामयाब होंगे।वरना हमारी मौत है।
दुनिया के लिए आज सबसे बुरी खबर है कि डोनाल्ड ट्रंप वाशिंगटन जीत चुके हैं और व्हाइट हाउस के तमाम दरवाजे और खिड़कियां उनके लिए खुले हैं उसीतरह जैसे अबाध पूंजी के लिए हमने अगवाड़ा पिछवाड़ा खोल रखा है।संजोगवश आज ही भारत के चक्रवर्ती महाराज के राज्याभिषेक की दूसरी वर्षी के मौके पर भारत में विज्ञापनों की केसरिया सुनामी है।भारत और अमेरिका ही नहीं,सोवियत संघ के विघटन के बाद टुकटा टुकड़ा लेनिन का ख्वाब और गिरती हुई चीन की दीवार पर भी धर्मध्वजा फहरा दिया गया है।

पलाश विश्वास
दैनिक जनतेचा महानायक या आंबेडकरी चळवळीतील अग्रगण्य दैनिकाचा दशकपूर्ती सोहळा येत्या शनिवारी नागपूर येथे संपन्न होत आहे. उत्तर नागपुरातील इंदोर परिसरातील बेझनबाग मैदानात हा भव्य सोहळा आयोजित करण्यात आला आहे. या सोहळ्यासाठी एक्ष्प्रेस वृत्तसमुहात मागील ३५ वर्षापासून कार्यरत असलेले कलकत्ता येथील प्रसिद्ध पत्रकार पलाश बिस्वास प्रमुख पाहुणे म्हणून उपस्थित राहणार आहेत. त्याचप्रमाणे दिल्ली येथील सुप्रसिद्ध पत्रकार व हस्तक्षेप या वेब पोर्टलचे संपादक अमलेन्दु उपाध्याय हे सुद्धा प्रमुख पाहुणे म्हणून उपस्थित होत आहेत.

आज रात की गाड़ी से नागपुर रवाना हो रहा हूं।

मिशन यह है कि बाबासाहेब के दीक्षाभूमि में अंबेडकरी आंदोलन के कार्यकर्ताओं और समर्थकों,बाबासाहेब के अनुयायियों को हमारे वैकल्पिक मीडिया के अनिवार्य अभियान में शामिल करना है।

वहां जनतेचा महानायक के दशकपूर्ती महोत्सव के मौके पर नागपुर के इंदौरा मैदान में 28 मई को सार्वजनिक सभा में वैकल्पिक मीडिया के हमारे युवा और समर्थ संपादक अमलेंदु उपाध्याय महाराष्ट्र की आम जनता के मुखातिब मुख्य वक्ता होंगे।

स्वागत कीजिये कि जनतेचा महानायक के संपादक सुनील खोब्रागड़े अब वैकल्पिक मीडिया के नये सिपाहसालार होंगे।

मराठी जनता अपने साहित्य.संस्कृति और पत्रकारिता की बहुरंगी विरासत के प्रति हिंदी दुनिया के मुकाबले बहुत ज्यादा संवेदनशील है तो हमें खुशी हो रही है कि हम नागपुर में बाबासाहेब की दीक्षाभूमि पर खड़ी जनता के बीच वहां हस्तक्षेप का मराठी और बांग्ला में विस्तार करने जा रहे हैं।

इसके साथ ही कृपया गौर करें कि  भारत विभाजन के बाद बंगाल की कुल आबादी के बराबर भारतभर में जो दलित बंगाली शरणार्थी छितराये हुए हैं , उनका बहुत बड़ा हिस्सा दंडकारण्य के आदिवासी भूगोल में बसे हैं।

बांग्ला भाषा उनकी मातृभाषा है और वे अपने इतिहास भूगोल और मातृभाषा से भी बेदखल हैं और उनकी चीखों को कहीं दर्ज नहीं किया जाता।मैं भी उन्हीं लोगों में से हूं जिन्हें बांग्ला में अपनी जमीन कभी मिली नहीं है और हिंदी में मेरा प्राण बसा है।

हर भारतीय भाषा और दुनियाभर में मनुष्यता की हर भाषा और हर बोली अब बांग्ला के साथ मेरा मातृभाषा है और बंगाल के इतिहास और भूगोल से बेदखली के बाद यही मेरा असल वजूद है।

बाबासाहेब की दीक्षा भूमि के आसपास महाराष्ट्र के विदर्भ में ऐसे मूक दलित बंगाली शरणार्थी भी बड़ी संख्या में बसे हैं और जनचेता महानायक का मुख्य सस्करण भी मुंबई से निकलता है।विदर्भ के माओवादी ब्रांडेड आदिवासी बहुल चंद्रपुर,गड़चिरौली और गोंडिया में मेरे ये स्वजन बसे हैं तो नागपुर भी मेरा उतना ही घर है जितना समूचा दंडकारम्य,अंडमान निकोबार,उत्तराखंड और यूपी।भारत के चप्पे चप्पे में हमारे वे लोग बसे हैं,जिनके लिए मेरे पिता जिये और मरे और वे सारे मेरे अपने परिजन है।उनकी अभिव्यक्ति के लिए वैकल्पिक मीडिया का यह अनिवार्य मिशन और जरुरी है।

हस्तक्षेप के साथ महानायक के समन्वय के आधार पर जो हम मराठी में हस्तक्षेप का विस्तार कर रहे हैं तो इसी मौके पर नागपुर की पवित्र दीक्षाभूमि से ही हस्तक्षेप का बांग्ला संस्करण भी लांच होना है।क्योंकि हमारी लड़ाई के लिए हमें हस्तक्षेप हर कीमत पर जारी रखना है चाहे हमें जान की बाजी ही क्यों न लगानी पड़े।

हमें उम्मीद है कि हमारे तमाम स्वजन,मित्र समर्थक सहकर्मी और जनप्रतिबद्ध परिचित अपरिचित इस मुहिम में देर सवेर हमारे साथ होगें।बाबासाहेब ने इस देश का संविधान रचा और मेहनतकशों के हकहकूक के स्थाई बंदोबस्त भी उनने किया तो बाबासाहेब के अनुायायियों का साथ हमें मिलना ही चाहिए और बाबासाहेब का मिशन आगे बढाना ही हमारा अनिवार्य कार्यभार है तो हमें उनका साथ भी हर कीमत पर चाहिए।जनतेचा महानायक हमारा आधार है।हम इसे राष्ट्रव्यापी बनाने का काम भी करेंगे।

इसी तरह हर भारतीय भाषा में अब देर सवेर हस्तक्षेप होगा और इसका सारा बोझ हम अमलेंदु पर लादने जा रहे हैं।हम हस्तक्षेप को हर बोली तक विस्तृत करना चाहते हैं ताकि वह लोकजीवन और लोकसंस्कृति की धड़कन तो बने ही,उसके साथ ही जनपक्षधरता के लिए नये माध्यम,विधा,व्याकरण और सौंदर्यशास्त्र भी गढ़ सके।

संपादकीय ढांचा जस का तस होगा और हम बाकी वैकल्पिक मीडिया और पूरे देश के साथ हस्तक्षेप को नत्थी करने के मिशन में हैं और हमें आपका बेशकीमती साथ,समर्थन और सहयोग चाहिए क्योंकि हम बाजार के व्याकरण के विरुद्ध विज्ञापन निर्भरता की बजाये आपके समर्थन के भरोसे यह आयोजन कर रहे हैं।

आप तनिक भी हमारी या हमारे मिशन की परवाह करते हों तो हस्तेक्षेप के पोर्टल के टाप पर ललगे  पे यू एप्स बटन पर तुरंत जो भी आप पे कर सकें तुरंत कीजिये।यह समर्थन मिला तो हम जरूर कामयाब होंगे।वरना हमारी मौत है।


अब आप मानें या न मानें मेरे जीवन में सबसे बड़े आदर्श मेरे गुरु जी ताराचंद्र त्रिपाठी,मेरे असल बड़े भाई आनंद स्वरुप वर्मा,पंकज बिष्ट और राजीव लोचन साह अपनी अविराम सक्रियता के बावजूद बूढ़े हो चुके हैं और हम भी अब चंद दिनों के मेहमान हैं।

इनके मुकाबले मेरी हालत बहुत ज्यादा खराब है क्योंकि तमाम वजहें हैं कि मैं अपने पहाड़ और अपने गांव के रास्ते को मुड़कर देख भी नहीं सकता और मैं अपने घर और अपनी जमीन से बेदखल हूं और फिलहाल एक बेरोजगार मजदूर हूं जिसके लिए सर छुपाने की भी जगह नहीं है और निजी समस्याएं इतनी भयंकर हैं कि उनसे निबटने के लिए कोई रक्षाकवच कुंडल वगैरह नहीं है मेरे पास।

ऐसे समय में इस रिले रेस का बैटन अब हमारे युवा ताजा दम साथियों के पास है।

जनांदोलन और जनमोर्चे पर क्या होगा,हम नहीं जानते लेकिन वैकल्पिक मीडिया के मोर्चे पर अमलेंदु उपाध्याय, यशवंत सिंह, अभिषेक श्रीवास्तव, रेयाजुल हक, साहिल, प्रमोद रंजन, चंदन,सुनील खोब्रागड़,डा.सुबोध बिश्वास,अशोक बसोतरा, अभिराम मल्लिक, ज्ञानशील,शरदेंदु बिश्वास,संजय जोशी,दिलीप मंडल,संजीव रामटेके,प्रमोड कांवड़े,अयाज मुगल जैसे कार्यकर्ताओं के हाथ बैटन है और उन्हें नेतृत्वकारी भूमिका के लिए खुद को जल्द से जल्द तैयार होना होगा और आपस में समन्वय भी बनाना होगा।

फिर अपना फोकस तय करना होगा क्योंकि मुक्तबाजार में मुद्दे भी वे ही तय कर रहे हैं और जनता के मुद्दे सिरे से गायब हैं।हम भटक नहीं सकते।इस तिलिस्म को तोड़ना है तो इसके तंत्र मंत्र यंत्र से बचने की दक्षता सजगता अनिवार्य है वरना हम लड़ ही नहीं सकते।कभी नहीं।सावधान।

वे अपने एजंडा लागू करने के लिए इंसानियत के मुल्क को खून के महासमुंदर में तब्दील कर रहे हैं सिर्फ भारत में ही नहीं,दुनियाभर में तो यह मोर्चाबंदी इस विश्वव्यवस्था के खिलाफ विश्वव्यापी होनी चाहिए और इस चुनौती का सामना उन्हें करना है।

हम हरचंद कोशिश में हैं कि अपने जनप्रतिबद्ध तमाम साथियों को एकजुट करें और दुनिया जोड़ने की बात तो बाद में करेंगे अगर आगे भी जियेंगे,फिलहाल देश जोड़ना बेहद जरुरी है।तुरंत जरुरी है।

गौरतलब है कि राजाधिराज मान्यवर डोनाल्ड ट्रंप के राज्य़ाभिषेक से पहले नक्सलबाड़ी किसान आंदोलन के पचासवें साल की शुरुआत आज से हो रही है। इसे हम बसन्त गर्जना या बज्रनाद के रूप में जानते हैं। तेभागा और तेलंगाना किसान आंदोलन की कड़ी में किसानों के इस आंदोलन ने जनवादी भारत का सपना देखा था जिसकी बुनियाद मजदूर किसान राज था।

आज उस सपने की विरासत,उस किसान आदिवासी मेहनतकश मजदूर के बदलाव की लड़ाई,राष्ट्र को जनवादी लोकतांत्रिक बनाने के कार्यभार का जो हुआ सो हुआ,तय यह है कि सत्तर के दशक की हमारी जिस पीढ़ी ने दुनिया बदलने की कसम ली थी,उसके बचे खुचे लोग अब अलविदा की तैयारी में हैं।

दूसरी तरफ भारत में जो असल सर्वहारा हैं,जो बहुसंख्य हैं,जो जल जमीन जंगल के साथ साथ नागरिक और मानवाधिकार से भी इस स्वतंत्र लोकतांत्रिक भारत में लगातार बेदखल हो रहे हैं और जिनके लिए मुक्तबाजार की यह व्यवस्था नरसंहारी है,वे लोग ख्वाबों की उस लहलहाती फसल से भी बेदखल हैं।

जनता के बेशकीमती ख्वाबों की बहाली अब जनप्रतिबद्धता का सबसे बड़ा कार्यभार है और इसलिए बाबासाहेब का जाति उम्मूलन का मिशन सबसे ज्यादा प्रासंगिक है क्योंकि जाति व्यवस्था की नींव पर ही यह धर्मोन्माद का तिलिस्म मुक्त बाजार है।

जातिव्यवस्था के बने रहते हम भारत के लोग न देशभक्त हैं और न राष्ट्रवादी और न लोकतांत्रिक और हम एक अनंत रंगभेदी वर्चस्व के आत्मघाती गृहयुद्ध में स्वजनों के वध के लिए महाभारत जी रहे हैं।
जाति व्यवस्था के बने रहने पर न समता संभव है और न न्याय और समरसता का धर्मोन्माद आत्मघाती है।

धर्मोन्मादी मुक्तबाजार का यह मनुस्मृति अनुशासन बंटी हुई मेहनतकश जनता के नरकंकालों का बेलगाम  कारोबार है तो जाति उन्मूलन के बाबासाहेब का एजंडा ही प्रतिरोध का प्रस्थान बिंदू है क्योंक बंटे हुए हम न अलग अलग जी सकते हैं और न हमारा कोई जनमत या जनादेश है और बच निकलने का कोई राजमार्ग।

दुनिया के लिए आज सबसे बुरी खबर है कि डोनाल्ड ट्रंप वाशिंगटन जीत चुके हैं और व्हाइट हाउस के तमाम दरवाजे और खिड़कियां उनके लिए खुले हैं उसीतरह जैसे अबाध पूंजी के लिए हमने अगवाड़ा पिछवाड़ा खोल रखा है।

संजोगवश आज ही भारत के चक्रवर्ती महाराज के राज्याभिषेक की दूसरी वर्षी के मौके पर भारत में विज्ञापनों की केसरिया सुनामी है।भारत और अमेरिका ही नहीं,सोवियत संघ के विघटन के बाद टुकटा टुकड़ा लेनिन का ख्वाब और गिरती हुई चीन की दीवार पर भी धर्मध्वजा फहरा दिया गया है।

यह धर्मध्वजा मुक्तबाजार का है,इसे आस्था में निष्णात मनुष्यता को समझाना बेहद मुश्किल है क्योंकि इतिहास की मृत्यु हो गयी है और विचारधारा भी बची नहीं है।

यह समझाना भी बेहद मुश्किल है कि मुक्तबाजार के व्याकरण के मुताबिक धर्म और नैतिकता,भाषा और संस्कृति,लोक जीवन का भी अवसान हो गया है।हम बेरहम बाजार में नंगे खड़े हैं और क्रयशक्ति ही एकमात्र सामाजिक मूल्य है।

अब हम मनुष्य भी नहीं रहे हैं।

हम बायोमेट्रिक डिजिटल रोबोटिक नागरिक अनागरिक हैं और हमारा कोई वजूद नहीं है।

मनुष्यता बची नहीं रहेगी तो प्रकृति और पृथ्वी के बचे होने की कोई उम्मीद भी नहीं है।

तनिको पांव जमाके रखिये जमीन पर दोस्तों कि आसमान गिर रहा है जमीन को खाने के लिए।

Sunday, March 6, 2016

Sunil Khobragade Editor,Marathi Daily Mahanayak and Republican Leader blsts Some of pseudo Ambedkarites,specially BAMSEFISTS and BHUL Niwasi waman bhakts, has become fidgety with the emergence of Kanhaiyya Kumar as an icon of the oppressed masses. I have to say that this cynic clan is not interested to enlarge the circumference of Ambedkarism. they want to confine the movement within their ghetto.


Sunil Khobragade
Editor,Marathi Daily Mahanayak and Republican Leader blsts
Some of pseudo Ambedkarites,specially BAMSEFISTS and BHUL Niwasi waman bhakts, has become fidgety with the emergence of Kanhaiyya Kumar as an icon of the oppressed masses. they are mentioning his Bhumihar caste and trying to malign him. They are highlighting that,Bhumihar are oppressors,they massacred Dalits, women, workers etc. they are raising questions about Laxmanpur Bathe Dalit massacre,About Ranveer Sena and raising doubts about Kanhaiyya's integrity to lead social transformation movement .
In this regard I have to say that this cynic clan is not interested to enlarge the circumference of Ambedkarism. they want to confine the movement within their ghetto. Its true that Some of Bhumihar maniacs like Brahmeshwar prasad Singh and the organization like Ranveer Sena acted against dalits.citing their example every member of Bhumihar community can't be blamed and branded anti dalit. if we see the history The Bhumihars were the first who fought to abolish Zamindari System and establish peasants right over land. prominent Bhumihar leader swami sahjanand sarswati laid Kisan sabha and fought against his own caste leader Ganesh Dutt singh who was pro-Zamindar. bhumhar leader Karyanand sharma was the person who established Khet Mazdoor Sabha and fought for the cause of landless labourers mostly dalits throughout his life. Revolutionary Yogendra Shukla and Kishori Prasanna Sinha, both were prominent aides of martyr Bhagat Singh. Bihar Kesari Dr.Krishn Singh Sinha was the first Chief minister in India who abolished zamindary system by law.those who raise doubts about Kanhaiyya on the basis of his Bhumihar caste must read about the contribution of The great Buddhist monk Mahapandit Rahul Sankrutyayan towards spreading Buddhism. He was Kedarnath Pandey, a Bhumihar by birth.but later he sacrificed his entire life for Buddhism.Though Rahulji was Buddhist Monk he actively participated in satyagrah against Zamindars. in 1939 when he participated in a satyagrah at Amwari village in chhapra district along with his fellow monk Nagarjun, he was attacked by Bhumihar zamindars.The blood oozing out of the head of yellow clad monk became rallying cry of the peasantry in Bihar. Rahulji emerged as an inspiring figure of all the peasants,workers in Bihar at that time.why could we not see future Rahul Sankrutyayan in Kanhaiyya ?

Like
Like
Love
Haha
Wow
Sad
Angry
CommentShare
Comments
Amol Gaikwad
Amol Gaikwad Very nicely written sir ... being so emotional in politics nowadays will be mistake but this kind of people will remain rigid
Like · Reply · 3 · 14 hrs
Shri Kant
Shri Kant अमोल गायकवाड़ साहेब ! अनुमोदन देने वाईट क्रिया नाहिए, ही सवय मात्र फ़ार वाईट आहे .
Like · Reply · 8 hrs
Amol Gaikwad
Amol Gaikwad हे घरी तुझ्या बापाला सांगायचं ... इथं नाही 
काय वाईट आणि काय बरोबर हे तु मला सांगायची लायकी नाही तुझी
Like · Reply · 1 · 8 hrs
Palash Biswas
Write a reply...
Pravin Jadhao
Pravin Jadhao Excellent sir , I really appreciate your article and you slapped such psceudo Ambedkarite .
Like · Reply · 3 · 14 hrs
Sunil Khobragade
Sunil Khobragade Those who wish to call themselves staunch Ambedkarite must not believe in caste system. I agree there may be differences on views but what abt radical thoughts ? When someone pollutes the original thoughts and philosophy of his master for his own gain I will prefer to call him pseudo
Like · Reply · 4 · 13 hrs · Edited
Sunil Khobragade
Sunil Khobragade Historical mistakes in politics can be rectified. But in Ideology & philosophy it can't .You must need solid Ideological base to fight with another ideology. You may extend it further to cop up with the circumstances but can't deviate.
Like · Reply · 3 · 13 hrs · Edited
Vijay Gaikwad
Vijay Gaikwad no one has claimed that Babasaheb wanted India to become like ussr or china. but neither did he express that in India the commanding heights of economy should be controlled by some handful tycoons . . .
Like · Reply · 1 · 12 hrs
Darshan Borkar
Darshan Borkar Nice try! आपने ये नही बताया की सिर्फ जयभिम बोलनेपर ही खुश होनोवाले लोगोंको क्या कहा जाये??? बाकी रही बात future की तो वो पता चल ही जायेगा।
Like · Reply · 2 · 11 hrs
Laxman Bagde
Laxman Bagde Educate organise agitate
Like · Reply · 1 · 10 hrs
Suresh Khillare
Suresh Khillare Good one sir...
Like · Reply · 1 · 10 hrs
Shri Kant
Shri Kant खोबरागड़े साहेब ! Let's our personal reservations and preferences that shape our internal differences , not benefit and any way feed into the brahminical status quo .
Like · Reply · 8 hrs
Shri Kant
Shri Kant Let us our petty differences not strengthen the Varna hegemony any way at any cost !
Like · Reply · 8 hrs · Edited
Shri Kant
Shri Kant If you are a voice is dissent among mainstream Phule- Ambedkrite movement , we want you to be " voice of 'our' dissent " not "their " .
Like · Reply · 8 hrs
Satish Sirsath
Satish Sirsath yes...agree..we should blame is caste..he is follower of progressive thoughts..
Like · Reply · 1 · 7 hrs
Shri Kant
Shri Kant Khobagade saheb, you will have to decide one day or other, whether you want to be just 'an editor' or 'an Ambedkrite editor' (please read editor as an intellectual). On the note of your seeing/showing empathy and impartiality towards ''Brahmeans" in ge...See More
Like · Reply · 1 hr · Edited
Shri Kant
Shri Kant Sharmishta Zen please follow here.
Like · Reply · 1 hr

--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

देश भर के वरिष्ठ पत्रकारों , सभी पत्रकार संगठनों , सभी प्रेस क्लब से अपील है कि नक्सल उन्मूलन अभियान के नाम पर मिली नाजायज स्वतंत्रता का छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा निष्पक्ष पत्रकारिता पर दबाव बनाने के उद्देश्य से बस्तर के पत्रकार साथी सोमारू नाग और संतोष यादव की फर्जी मामलों में जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तारी के विरोध में और पत्रकार सुरक्षा कानून लागु करने की मांग को लेकर 5 मार्च 2016 को आहूत "विधानसभा कूच" करने को लेकर रायपुर में आयोजित " पत्रकार महा आंदोलन " में शामिल होकर इसे सफल बनायें | यह आंदोलन पूरी तरह केवल सोशल मिडिया के माध्यम से चलाया गया है | इसी अभियान के तहत आंदोलन का क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय चरण " 10 अक्टूबर को रायपुर प्रदर्शन " तथा 21 दिसम्बर 2015 को बस्तर (जगदलपुर) में "जेल भरो आंदोलन" के रूप में सफल हुआ था | आप सभी से निवेदन है कि आप बिना किसी फोन या संपर्क की प्रतीक्षा किये बिना और बिना किसी अहम् या नाराज हुए बिना इस अभियान में शामिल हों | मै आंदोलन को सहमति देने वाले और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हिमायती सभी जनसंगठनों , संस्थाओं , राजनीतिज्ञों , बुद्धिजीवियों और

देश भर के वरिष्ठ पत्रकारों , सभी पत्रकार संगठनों , सभी प्रेस क्लब से अपील है कि नक्सल उन्मूलन अभियान के नाम पर मिली नाजायज स्वतंत्रता का छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा निष्पक्ष पत्रकारिता पर दबाव बनाने के उद्देश्य से बस्तर के पत्रकार साथी सोमारू नाग और संतोष यादव की फर्जी मामलों में जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तारी के विरोध में और पत्रकार सुरक्षा कानून लागु करने की मांग को लेकर 5 मार्च 2016 को आहूत "विधानसभा कूच" करने को लेकर रायपुर में आयोजित " पत्रकार महा आंदोलन " में शामिल होकर इसे सफल बनायें | यह आंदोलन पूरी तरह केवल सोशल मिडिया के माध्यम से चलाया गया है | इसी अभियान के तहत आंदोलन का क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय चरण " 10 अक्टूबर को रायपुर प्रदर्शन " तथा 21 दिसम्बर 2015 को बस्तर (जगदलपुर) में "जेल भरो आंदोलन" के रूप में सफल हुआ था | आप सभी से निवेदन है कि आप बिना किसी फोन या संपर्क की प्रतीक्षा किये बिना और बिना किसी अहम् या नाराज हुए बिना इस अभियान में शामिल हों |
मै आंदोलन को सहमति देने वाले और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हिमायती सभी जनसंगठनों , संस्थाओं , राजनीतिज्ञों , बुद्धिजीवियों और समाज सेवियों से भी आह्वान करता हूँ कि वे इस दिन अपनी उपस्थिति पत्रकरिता आंदोलन के इतिहास की इस महत्व पूर्ण घडी में अवश्य दर्ज कराएं |

RUSH!हमसे जुड़ें!हस्तक्षेप के संचालन में छोटी राशि से सहयोग दें For continuous Public Hearing!

In New York protests against communal killings in India. We are not bartering justice for toilets, bank accounts, yoga, long term visa, clean Ganga..... LET'S MAKE JUSTICE IN INDIA!

OPINION

WHY FORGET THE DEAD OF 2002??

Vrinda Grover  Barkha Dutt has just proclaimed that 9/11 can never be
Read More
News from States Hastakshep
पश्चिम बंगाल

बंगाल में घिरा संघ परिवार, उग्र हिंदुत्व के तीर तरकश बेकार तो बौखलाने लगे बजरंगी!

पलाश विश्वास कोलकाता।




म्युनिस्ट पार्टी ने
Read More
BREAKING NEWS
बहस

कर्मचारियों की पेट काटकर की गई बचत पर मोदी सरकार की सेंधमारी

कर्मचारी भविष्य निधि पर आयकर या



Anand Teltumbde is a writer and activist with the Committee for the Protection of Democratic Rights, Mumbai.
COLUMN

SCOURGE OF THE SCOUNDRELS

Anand Teltumbde Patriotism is the last refuge of scoundrels -Samuel Johnson Close on the
Read More
CPI(M)
मध्य प्रदेश/ छत्तीसगढ़

चर्च पर हमला : माकपा ने की अपराधियों को गिरफ्तार करने की मांग

रायपुर। मार्क्सवादी क




DON'T MISS: HASTAKSHEP | हस्तक्षेप

बंगाल में घिरा संघ परिवार, उग्र हिंदुत्व के तीर तरकश बेकार तो बौखलाने लगे बजरंगी!

बंगाल में घिरा संघ परिवार, उग्र हिंदुत्व के तीर तरकश बेकार तो बौखलाने लगे बजरंगी!

पलाश विश्वास कोलकाता। उग्र हिंदुत्व के रास्ते चलकर कमसकम बंगाल में संघ परिवार को कुछ हासिल नहीं होने वाला है। बंगाल में भाजपा के अध्यक्षपद पर तपन सिकदर और तथागत राय जैसे लोग रहे हैं जो बंगाल की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के जानकार रहे हैं, लेकिन राहुल सिन्हा को अध्यक्ष बनाकर बंगाल में हिंदुत्व की सुनामी […]

SCOURGE OF THE SCOUNDRELS

Scourge of the Scoundrels

Anand Teltumbde Patriotism is the last refuge of scoundrels -Samuel Johnson Close on the heels of the institutional murder of Rohith Vemula, has come another attack of the Hindutva forces on the Jawaharlal Nehru University (JNU) students. A pattern in these episodes including the previous one, that of banning the Ambedkar Periyar Study Circle (APSC) […]

चर्च पर हमला : माकपा ने की अपराधियों को गिरफ्तार करने की मांग

चर्च पर हमला : माकपा ने की अपराधियों को गिरफ्तार करने की मांग

रायपुर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने रायपुर में बजरंग दल द्वारा एक चर्च में घुसकर तोड़-फोड़ करने, प्रार्थना कर रही महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने तथा दो साल के बच्चे को जमीन में पटकने की घटना की तीखी निंदा करते हुए अपराधियों को गिरफ्तार करने की मांग की है. एक बयान में माकपा राज्य सचिव संजय […]

कर्मचारियों की पेट काटकर की गई बचत पर मोदी सरकार की सेंधमारी

कर्मचारियों की पेट काटकर की गई बचत पर मोदी सरकार की सेंधमारी

कर्मचारी भविष्य निधि पर आयकर या कर्मचारियों की पेट काटकर की गई बचत पर सेंधमारी अरुण कान्त शुक्ला स्वतन्त्र भारत के इतिहास में शायद ही किसी वित्तमंत्री या उसके विभाग को बजट में किये गए प्रस्तावों में से किसी एक पर इतने स्पष्टीकरण देने पड़े होंगे, जितने अरुण जेटली और उनके वित्त मंत्रालय को कर्मचारी […]

देश में देशद्रोह के नाम पर अघोषित आपातकाल – दारापुरी

देश में देशद्रोह के नाम पर अघोषित आपातकाल – दारापुरी

बाराबंकी: 6 मार्च, 2016।  "आज देश में देशद्रोह के नाम पर अघोषित आपातकाल की स्थिति है और केन्द्र में बैठी मोदी सरकार अपने विरूद्ध उठती हुयी जनमानस की आवाज व जन मुद्दों को उठाने वालों को आतंकित करने का प्रयास कर रही है।" यह विचार किसान सभा द्वारा गांधी भवन में "लुटेरों से आजादी" शीर्षक […]



Read More
Let Me Speak Human!
मुद्दा

ना ना,  आज़ादी कोई अधूरी लावारिस चीख नहीं है!

वे लोग कौन हैं जो रोहित से कन्हैया को
Read More
Comrade Kanhaiya Kumar Gets Bail
आजकल

कन्हैया को एक और नायक बनाकर हम उनके विचारों की हत्या कर देंगे

लोकतांत्रिक राजनीति में विपक्ष को
Read More
Kanhaiya Kumar, जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार
आजकल

आप 'मन की बात' करते हैं, कभी मां की बात भी कर लीजिए

जेएनयू संघर्ष के जरिये भारत
Read More
Comrade Kanhaiya Kumar Gets Bail
देश

अफजल गुरु नहीं, रोहित वेमुला मेरा आदर्श – कन्हैया

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ के
Read More
Kanhaiya Kumar, जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार
सियासत

शरीर भले ही कन्हैया का हो लेकिन उसमें आत्मा रोहित वेमुला की है

जब सड़क पड़ी संसद पर
Read More
Randheer Singh Suman, रणधीर सिंह सुमन
लोकसंघर्ष

#GKPILLAIEXPOSED अपराधियों को बचाने के लिए दूर से निशाना

हेडली का बया




Subscribe


--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Welcome

Website counter

Followers

Blog Archive

Contributors